
राम से ज्यादा राम के नाम का प्रभाव दिखता है - फोटो : Social Media
सामान्य बोलचाल की भाषा में रामराज की बात कह दी जाती है। यानी भारत में रामराज को आदर्श माना जाता है। भारतीय मजदूर संघ के संस्थापक दत्तोपंत ठेंगरी, रामराज को क्लासलेस सोसाइटी की तरह का शासन मानते थे। दूसरी ओर राम से ज्यादा राम के नाम का प्रभाव दिखता है। तुलसी दास जी कहते हैं कि कलयुग केवल नाम अधारा। मसलन राम शब्द का अर्थ होता है स्वयं के अंदर का प्रकाश। भगवान श्रीराम को भगवान विष्णु का अवतार माना जाता है।
राम से पहले राम के नाम का प्रभाव व्यापक हो चुका था और जमदग्नि ने अपने प्रतापी पुत्र का नाम भी राम ही रखा था, जो बाद में चलकर परशुराम के नाम से विख्यात हुए। चूंंकि वे अपने साथ परशु रखते थे इसलिए उनका नाम परशुराम पड़ गया।
राम के चरित्र पर दुनिया भर में कई किताबें लिखी गई हैं। राम के चरित्र पर लिखी गई सबसे पुरानी किताब वाल्मिकी रामायण को ही माना जाता है। हालांकि इस मामले में विद्वानों के बीच मतैक्य नहीं है, लेकिन ज्यादातर लोग इसी रामायण को आद्य रामायण मानते हैं। एक अध्यात्म रामायण भी है, जिसके बारे में कहा जाता है कि इसे खुद भगवान शिव ने पार्वती को सुनाने के लिए रचा था।
राम के चरित्र पर दुनिया भर में कई किताबें लिखी गई हैं। राम के चरित्र पर लिखी गई सबसे पुरानी किताब वाल्मिकी रामायण को ही माना जाता है। हालांकि इस मामले में विद्वानों के बीच मतैक्य नहीं है, लेकिन ज्यादातर लोग इसी रामायण को आद्य रामायण मानते हैं। एक अध्यात्म रामायण भी है, जिसके बारे में कहा जाता है कि इसे खुद भगवान शिव ने पार्वती को सुनाने के लिए रचा था।
सामान्य राजा के रूप में भी भगवान राम के चरित्र को देखें तो...

राम के राज्य में प्रजा बेहद सुखी थी - फोटो : self
कर्म के विभाजन की बात होती है तो शासन को संतुलन पर ध्यान रखना पड़ता है...

राम के राज्य में एक व्यक्ति एक काम के सिद्धांत को सख्ती से पालन किया जाता था
राम का व्याप आज भी कई देशों में देखने को मिलता है...

राजा रामचन्द्र के राज में किसी प्रकार की कोई कमी नहीं थी - फोटो : self
